Monday, November 2, 2009

नानक नाम जहाज है


"नानक नाम जहाज है चडे सो उतरे पार" हमारे गुरुओ ने देश और दुनिया में शांति और धर्म बनाये रखने के लिए अपने सर तक कटवा दिए और जरूरत पड़ने पर दुष्टों के सर काट भी दिए क्योकि कई बार अगर शरीर का कोई हिस्सा बेकार हो जाये तो जान बचने के लिए उस हिस्से को शरीर से अलग करना जरूरी हो जाता है लेकिन फिर भी बाबा जी कुछ ऐसा करे की बिना किसी मार काट के सारी  दुनिया  में सुख और शांति आये यही आज के दिन मेरी उस परम पिता से दुआ है 
      

3 comments:

Udan Tashtari said...

हम भी दुआ करते हैं.

अजय कुमार said...

हिंदी ब्लॉग लेखन के लिए स्वागत और शुभकामनायें
कृपया अन्य ब्लॉगों को भी पढें तथा अपने सुन्दर
विचारों से उत्साहवर्धन करें

Amit K Sagar said...

चिटठा जगत में आपका हार्दिक स्वागत है. लेखन के द्वारा बहुत कुछ सार्थक करें, मेरी शुभकामनाएं.
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