Tuesday, November 17, 2009

मोह माया त्याग दोगे तो वो नहीं मिलेगा

अगर कभी भी, कही भी, कोई भी, उस परम पिता को पाने की बात कहे तो सबसे पहले यही सुनने को मिलता है की मोह माया का त्याग करो तभी वो मिलेगा लेकिन मेरा इस बात में जरा भी यकीन नहीं है मै तो ये मानता हूँ की प्रेम से, मोह से, ममता से ही उसे पाया जा सकता है हिंसा से, बैर से तो वो भी बहुत दूर है और हमको भी दूर रहने को ही कहता है इसलिए जो मोह - माया का त्याग करने को कहते है वो हो सकता है अपनी जगह सही हो पर मै ये करने को नहीं कहता और फिर भी मै ये दावा करता हूँ की बिना मोह - माया का त्याग किये भी उसे पाया जा सकता है यूं समझो की की ये मेरा रास्ता है  एक नया रास्ता सबसे सरल, सबसे सुविधाजनक   जिस पर मै चलता हूँ और चलता जाऊगा और मुझे विश्वास है की एक दिन वो मेरे सामने होगा और अगर कोई मेरे पीछे हुआ तो उसके भी और अगर तुम्हे पसंद हो तो तुम भी आओ मिलके सफ़र करेगे वक्त जल्दी बीत जायेगा, रास्ता आसानी से कट जायेगा फिर भी यदि तुम्हे कष्ट दायक रास्ता पसंद है तो तुम्हारी मर्ज़ी   लेकिन एक बात का धयान रखना की जो तुम्हे कष्ट सहने को कहता है वो खुद कितने कष्ट सह रहा है तुम्हे पैदल चलने की सलाह देने वाला क्या खुद पैदल चल रहा है ? तुम्हे रेश्म छोड़ ने की सलाह देने वाला खुद खादी पहनता है ?  जो मार्ग दिखलाये वो नहीं जो मार्ग पर चल कर बताये वो मार्गदर्शक है